इस तरफ खामोश तट पर
किश्तियां ठहरी हुई हैं
उस तरफ ,उस पार का वो
द्रश्य देखे जा रहा हूँ /
बीच में उत्ताल लहरें
इस कदर फैली हुई हैं
मैं तरंगित से जलधि को
पार करने जा रहा हूँ /
थी हकीकत प्यार में जो,बेतहाशा दिख रही थी
दूर तक फैले समुंदर ,ज्वार से भरने लगे थे /
है अगर अनजान मंजिल तो उसे आसान कर दो
प्यार में गुजरे पलों को तुम जरा नीलाम कर दो /
डूब जाओ ,बांट डालो,प्यार की हर पर्त खोलो
इस तरह अपनी सुहानी जिन्दगी की शाम कर दो /
जिन्दगी इतनी सुहानी क्यों हमें लगने लगी थी
क्यों यहाँ मौसम हमारे साथ में चलने लगे थे
क्यों हमें लगने लगा था यह जहां है बस हमारा
क्यों हमारी हसरतों में पंख -से उगने लगे थे ?
कसमसाते प्यार की दुनिया बसाए जा रहे हैं
आदमी को आदमी -सा हम बनाये जा रहे हैं /
बेखबर क्यों प्यार से रहने लगा हर आदमी अब
प्यार यह क्या चीज है उसको बताये जा रहे हैं /
लोग शिकवा कर रहे हैं और ताने दे रहे हैं
बेवफाई के हजारों ही उलाहने दे रहे हैं
क्यों नहीं समझे यहां वो , है समर्पण प्यार में बस
प्यार के अंतिम पलों को, हम भुनाए जा रहे हैं /
कसमसाते प्यार की दुनिया बसाए जा रहे हैं
आदमी को आदमी -सा हम बनाये जा रहे हैं /
बेखबर क्यों प्यार से रहने लगा हर आदमी अब
प्यार यह क्या चीज है उसको बताये जा रहे हैं /
आदमी की मुस्कुराहट देखने की जिद हमें है
इसलिए गम के खजाने हम लुटाये जा रहे हैं /
है अगर अनजान मंजिल तो उसे आसान कर दो
प्यार में गुजरे पलों को तुम जरा नीलाम कर दो /
जमीं रहतीं हैं पलकें क्यों
तुम्हारे ही ख्यालों में
ख्यालों की नुमाइश को
लगाये जा रहा हूँ मैं ?
मुझे मालूम है दुनिया
यह तिनकों का घरोंदा है
हजारों बीन कर लाया
लुटाये जा रहा हूँ मैं /
बहुत उम्मीदियां लेकर
बुलाये जा रहा हूँ मैं
दिशाओं के धुंधलके भी
हटाए जा रहा हूँ मैं /
वही , आबाज जब तक मैं
न सुन लूँगा तुम्हारी वो
न जाने किन दिवारों को
गिराए जा रहा हूँ मैं ?
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें